ए लमहा थम जा जरा,
जिना अभी बाकी है...!
अभी तो चलना सिखा है,
दौडना तो अभी बाकी है...!
जिना अभी बाकी है...!
अभी तो चलना सिखा है,
दौडना तो अभी बाकी है...!
दोस्तो का साथ है ,
जैसे कल की तो बात है...!
जिंदगी मे मजाक मस्ती,
जैसे उन्ह लोगोकी सौगात है...!
जैसे कल की तो बात है...!
जिंदगी मे मजाक मस्ती,
जैसे उन्ह लोगोकी सौगात है...!
पलके मिटाके सपने देखना,
जैसे जिनेकी चाहत है...!
वो सपने पुरा करना,
जैसे छोटे बच्चे की दिलकी राहत है...!
जैसे जिनेकी चाहत है...!
वो सपने पुरा करना,
जैसे छोटे बच्चे की दिलकी राहत है...!
जिंदगी हर तरह से जिनेकी,
एक पुरानी आदत है...!
हसते हसते रोना आ जाए,
ऐसी हमारी फितरत है...!
एक पुरानी आदत है...!
हसते हसते रोना आ जाए,
ऐसी हमारी फितरत है...!
हर रास्ते पर जाओगे,
तो बिछारा हुँवा फुल हम ही होंगे...!
जैसे फुलोपर पाव रखोंगे,
तो आखोमे पानी लानेवाले हम होंगे...!
तो बिछारा हुँवा फुल हम ही होंगे...!
जैसे फुलोपर पाव रखोंगे,
तो आखोमे पानी लानेवाले हम होंगे...!
काश मै वक्त की जगह,
और वक्त मेरी जगह होता...!
तो जिंदगीका हर लमहा,
जिनेसे पहले मेरा गुलाम होता...!
और वक्त मेरी जगह होता...!
तो जिंदगीका हर लमहा,
जिनेसे पहले मेरा गुलाम होता...!
इस वक्त के साथ ,
जिंदगी बदलना बाकी है...!
बदलनेवाली जिंदगीके,
हिसाब चुकाना बाकी है...!
ए लमहा थम जा जरा,
जिना अभी बाकी है...!!
जिना अभी बाकी है...!!
© ओंकार शिंदे
२६ फेब्रुवारी २०१५


