Thursday, 9 April 2015

कभी लगता है...!!!



कभी लगता है
कर पाता तेरे दिलसे बात तो शिकायत ना करनी पडती
आज अकेला जी रहा हूँ तुम्हारी याद मै
तेरी यादोमे जिंदगी बितानी नही पडती

कभी लगता है
दिल की बात ओठोंपे आ जाती तो अच्छा होता
आज वो दिल कह रहा है; कह देता पहले
तो एक प्यार का नया अपसाना होता

कभी लगता है
घडी का काटा मै जब चाहे रोक सकता
तेरा हात पकडकर तेरी आखोंमे देखकर
हर एक लमहा मै अपनी तरहसे जी सकता

कभी लगता है
तू साथ होती तो जिनेका क्या मजा होता
तेरे ओठोंपर मेरे ओठोंका नाम होता
और साथ बिताया हुँवा हर एक पल; यादगार लमहा होता

कभी लगता है
आपके इन ओठोंकी मुस्कुराहटमे हम हकदार होते
कब आखें बंद हो जाए पता नही चलता
काश हम जिंदगीभर आपके साथ होते



© ओंकार शिंदे
१० एप्रिल २०१५